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सोमवार, 16 सितंबर 2019

भारत को चांद पर पहुंचाने वाला आम बेचकर पहुंचा इस जगह तक ?

भारत को चांद पर पहुंचाने वाला आम बेचकर पहुंचा इस जगह तक ?

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आम बेचकर पढ़े और भारत को चांद पर पहुंचा दिया

भारत के मिशन चंद्रयान 2 के बारे में दुनिया जानती है, दुनिया के लोग यह भी जानते हैं चंद्रयान 2 का ऑर्बिटर तो चंद्रमा के चारों और चक्कर काट रहा है, लेकिन विक्रम लैंडर से वैज्ञानिकों का संपर्क टूट गया है पूरी प्रक्रिया में एक आदमी प्रधानमंत्री के गले लगते हुए दिखा  जिनका नाम है के सीवन इसरो यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (भारतीय अंतरिक्ष रिसर्च संगठन) के मुखिया यह वो आदमी जिसने वह कारनामा करके दिखाया इसे करने की कोशिश अब तक कोई भी देश नहीं कर पाया है! मैं आदमी अपनी कोशिशों में कामयाब नहीं हो पाया लेकिन उसने और उसकी टीम ने जो कर दिखाया है, अब पूरी दुनिया उसकी मिसाल दे रही हैं, लेकिन के सीवन का सफर इतना आसान नहीं रहा है उनके संघर्ष की कहानी थोड़ी लंबी है
बाजार में आम बेचकर चूकाते थे स्कूल की फीस ?
के सीवन कैलाशवादिवू सीवन कन्याकुमारी में पैदा हुए हैं, इनका जन्म: 14 अप्रैल 1957 मैं हुआ (आयु 62 वर्ष) उनकी पत्नी का नाम मालाथि के सीवन हैं, के के सीवन का परिवार करीब था इतना की  के सीवन की पढ़ाई की लिए भी पैसे नहीं थे, काम के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते थे तमिल भाषा में आठवीं क्लास तक वहीं पर पढ़ाई की आगे की पढ़ाई के लिए गांव से बाहर निकलना था लेकिन घर में पैसे नहीं थे के सीवन को पढ़ने के लिए फीस झुटानी थी इसके लिए उन्होंने पास के बाजार में आम बेचना शुरू किया जो पैसे मिलते से उससे मेरी फीस भरते!
इसरो चीफ के सिवन ने नहीं मानी हार, ट्वीट कर कही ये बात -
 विक्रम लैंडर से वैज्ञानिकों का संपर्क टूट गया है

के सीवन ने अपने बारे में क्या बताया ?

उन्होंने बताया था कि मैं एक गरीब परिवार में पैदा हुआ था मेरे बड़े भाई ने पैसे ना होने की वजह से मेरी पढ़ाई रुकवा दी. मेरे पिता कैलाशा वादिवू एक किसान थे, मैं साइकिल पर आम लेकर जाता था और वह वह बाजार बेचकर कर मेरी पढ़ाई की फीस भरते थे, आम बेचकर के सीवन ने इंटरमीडिएट तो कर लिया,
लेकिन ग्रेजुएशन के लिए और पैसे चाहिए थे, ऐसे ना होने की वजह से के पिता ने कन्याकुमारी के नागर कुल के हिंदू कॉलेज में दाखिला करा दिया. जब वह हिंदू कॉलेज मैं मैथ्स मैं bsc करने पहुंचे तो पैरों में चप्पले आई धोती कुर्ता और चप्पल इससे पहले के सीवन के पास कभी इतने पैसे नहीं हुए थे कि वो अपने लिए जोड़ी चप्पल खरीद सके!
 रॉकेट मैन / चंद्रयान-2 की कमान संभालने वाले सिवन के पिता ...
प्रधानमंत्री के गले लगते हुए दिखा  जिनका नाम है के सीवन इसरो यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन

मैथ्स मैं 100 - 100 नंबर लेकर आए. और फिर उनका मन बदल गया अब उन्हें मैथ्स की नहीं साइंस की पढ़ाई करनी थी, इसके लिए वह पहुंच गए mit यानी मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी वहां उन्हें स्कॉलरशिप मिली वहां उनने हवाई जहाज बनाने वाली रॉकेट बनाने वाली पढ़ाई होती हे उसमें बीटेक किया और उसके बाद 14 जनवरी 2015 को के सीवन को इसरो कामख्या नियुक्त कर दिया
उसके बाद इसरो ने 15 फरवरी 2017 को एक साथ 104 सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे ऐसा करके इसरो ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया उसके बाद इस रखा सबसे बडा मिशन था आज चंद्रयान 2 जिसको 22 जुलाई 2019 को लांच किया गया, चंद्रयान तो हिस्सों में बट गया पहला हिस्सा था ऑर्बिटर जिसने चंद्रमा की चक्कर लगाने शुरू कर दिए दूसरा हिस्सा जिसे विक्रम नाम दिया गया था इसे 6 सितंबर की रात चांद पर उतरना था सब ठीक-ठाक की अचानक संपर्क टूट गया उसके बाद जो हुआ वो सारी दुनिया ने देखा भावुक पल इसरो चीप नरेंद्र मोदी के गले लगकर रोने लगे लेकिन यह के सीवन है अपनी जिंदगी में भी परेशानियां जेलकर सफलता हासिल की अब थोड़ी बड़ी कामयाबी से थोड़ा चूक गए हैं लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम है हम एक दिन जरुर कामयाब होंगे 

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